उद्योग पर्व  अध्याय १३५

कुन्त्यु उवाच

विदितौ हि तवात्यन्तं क्रुद्धाविव यमान्तकौ |  २०   क
भीमार्जुनौ नय़ेतां हि देवानपि परां गतिम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति