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शान्ति पर्व
अध्याय ८२
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नारद उवाच
भेदाद्विनाशः सङ्घानां सङ्घमुख्योऽसि केशव |  २५   क
यथा त्वां प्राप्य नोत्सीदेदय़ं सङ्घस्तथा कुरु ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति