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द्रोण पर्व
अध्याय १३५
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सञ्जय़ उवाच
नृत्यमानाविव रणे मण्डलीकृतकार्मुकौ |  ४१   क
परस्परवधे यत्तौ परस्परजय़ैषिणौ ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति