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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५५
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गौतम उवाच
यद्दुर्लभं हि लोकेऽस्मिन्रत्नमत्यद्भुतं भवेत् |  २६   क
तदानय़ेय़ं तपसा न हि मेऽत्रास्ति संशय़ः ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति