आदि पर्व  अध्याय १३६

वैशम्पाय़न उवाच

तरसा पादपान्भञ्जन्महीं पद्भ्यां विदारय़न् |  १९   क
स जगामाशु तेजस्वी वातरंहा वृकोदरः ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति