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शान्ति पर्व
अध्याय १३६
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भीष्म उवाच
श्रुतं मे तव मार्जार स्वमर्थं परिगृह्णतः |  १०१   क
ममापि त्वं विजानीहि स्वमर्थं परिगृह्णतः ||  १०१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति