menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय ९२
chevron_left
chevron_right
अग्निरु उवाच
कल्माषगोय़ुगेनाथ युक्तेन तरतो जलम् |  १८   क
पितरोऽभिलषन्ते वै नावं चाप्यधिरोहतः |  १८   ख
सदा नावि जलं तज्ज्ञाः प्रय़च्छन्ति समाहिताः ||  १८   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति