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शान्ति पर्व
अध्याय १३६
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भीष्म उवाच
कृत्वा हि पूर्वं मित्राणि यः पश्चान्नानुतिष्ठति |  १२१   क
न स मित्राणि लभते कृच्छ्रास्वापत्सु दुर्मतिः ||  १२१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति