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शान्ति पर्व
अध्याय १३६
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भीष्म उवाच
यानि मे सन्ति मित्राणि ये च मे सन्ति वान्धवाः |  १२३   क
सर्वे त्वां पूजय़िष्यन्ति शिष्या गुरुमिव प्रिय़म् ||  १२३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति