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शान्ति पर्व
अध्याय ३४७
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नागभार्यो उवाच
अहं त्वनेन नागेन्द्र सामपूर्वं समाहिता |  १५   क
प्रस्थाप्यो मत्सकाशं स सम्प्राप्तो भुजगोत्तमः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति