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शान्ति पर्व
अध्याय १३६
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भीष्म उवाच
कालो हेतुं विकुरुते स्वार्थस्तमनुवर्तते |  १५१   क
स्वार्थं प्राज्ञोऽभिजानाति प्राज्ञं लोकोऽनुवर्तते ||  १५१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति