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आदि पर्व
अध्याय २१३
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वैशम्पाय़न उवाच
जन्मप्रभृति कृष्णश्च चक्रे तस्य क्रिय़ाः शुभाः |  ६४   क
स चापि ववृधे वालः शुक्लपक्षे यथा शशी ||  ६४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति