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शान्ति पर्व
अध्याय १३६
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भीष्म उवाच
व्राह्मणैश्चापि ते सार्धं यात्रा भवतु पाण्डव |  २०८   क
व्राह्मणा हि परं श्रेय़ो दिवि चेह च भारत ||  २०८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति