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शान्ति पर्व
अध्याय १३६
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भीष्म उवाच
तत्र स्म नित्यं वध्यन्ते नक्तं वहुविधा मृगाः |  २५   क
कदाचित्तत्र मार्जारस्त्वप्रमत्तोऽप्यवध्यत ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति