वन पर्व  अध्याय १०६

लोमश उवाच

अंशुमानपि धर्मात्मा महीं सागरमेखलाम् |  ३५   क
प्रशशास महाराज यथैवास्य पितामहः ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति