शान्ति पर्व  अध्याय १३६

भीष्म उवाच

कदाचिद्व्यसनं प्राप्य सन्धिं कुर्यान्मय़ा सह |  ४४   क
वलिना संनिविष्टस्य शत्रोरपि परिग्रहः |  ४४   ख
कार्य इत्याहुराचार्या विषमे जीवितार्थिना ||  ४४   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति