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द्रोण पर्व
अध्याय १०१
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सञ्जय़ उवाच
तस्य द्रोणो हय़ान्हत्वा सारथिं च महावलः |  २९   क
अथैनं पञ्चविंशत्या साय़कानां समार्पय़त् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति