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शान्ति पर्व
अध्याय २३७
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व्यास उवाच
एकश्चरति यः पश्यन्न जहाति न हीय़ते |  ५   क
अनग्निरनिकेतः स्याद्ग्राममन्नार्थमाश्रय़ेत् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति