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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
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व्रह्मो उवाच
अपोह्य सर्वसङ्कल्पान्संय़म्यात्मानमात्मनि |  ३४   क
स तद्व्रह्म शुभं वेत्ति यस्माद्भूय़ो न विद्यते ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति