उद्योग पर्व  अध्याय १३६

वैशम्पाय़न उवाच

ज्योतींषि प्रतिकूलानि दारुणा मृगपक्षिणः |  २०   क
उत्पाता विविधा वीर दृश्यन्ते क्षत्रनाशनाः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति