वन पर्व  अध्याय ८७

धौम्य उवाच

अप्यत्र संस्तवार्थाय़ प्रजापतिरथो जगौ |  १४   क
पुष्करेषु कुरुश्रेष्ठ गाथां सुकृतिनां वर ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति