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द्रोण पर्व
अध्याय १३६
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सञ्जय़ उवाच
सा पाण्डुपुत्रस्य शरैर्दार्यमाणा महाचमूः |  १८   क
तमसा संवृते लोके व्यद्रवत्सर्वतोमुखी ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति