द्रोण पर्व  अध्याय १३६

सञ्जय़ उवाच

यौधेय़ारट्टराजन्यान्मद्रकांश्च गणान्युधि |  ५   क
प्राहिणोन्मृत्युलोकाय़ किरीटी निशितैः शरैः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति