शान्ति पर्व  अध्याय १३७

युधिष्ठिर उवाच

एतन्मे संशय़ं छिन्धि मनो मे सम्प्रमुह्यति |  ३   क
अविश्वासकथामेतामुपश्रुत्य पितामह ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति