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शान्ति पर्व
अध्याय १३७
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व्रह्मदत्त उवाच
यत्कृते प्रतिकुर्याद्वै न स तत्रापराध्नुय़ात् |  ३१   क
अनृणस्तेन भवति वस पूजनि मा गमः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति