शान्ति पर्व  अध्याय १३७

व्रह्मदत्त उवाच

अन्योन्यकृतवैराणां संवासान्मृदुतां गतम् |  ३७   क
नैव तिष्ठति तद्वैरं पुष्करस्थमिवोदकम् ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति