शान्ति पर्व  अध्याय १३७

भीष्म उवाच

शृणु कौन्तेय़ यो वृत्तो व्रह्मदत्तनिवेशने |  ४   क
पूजन्या सह संवादो व्रह्मदत्तस्य पार्थिव ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति