भीष्म पर्व  अध्याय २९

श्रीभगवानु उवाच

उदाराः सर्व एवैते ज्ञानी त्वात्मैव मे मतम् |  १८   क
आस्थितः स हि युक्तात्मा मामेवानुत्तमां गतिम् ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति