शान्ति पर्व  अध्याय १३७

पूजन्यु उवाच

दुःखं जरा व्रह्मदत्त दुःखमर्थविपर्ययः |  ५९   क
दुःखं चानिष्टसंवासो दुःखमिष्टविय़ोगजम् ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति