शान्ति पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

भीष्मावमानात्सङ्ख्याय़ां रथानामर्धकीर्तनात् |  १२   क
शल्यात्तेजोवधाच्चापि वासुदेवनय़ेन च ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति