वन पर्व  अध्याय १३७

लोमश उवाच

निगृहीतं तु शूद्रेण यवक्रीतं स राक्षसः |  १९   क
ताडय़ामास शूलेन स भिन्नहृदय़ोऽपतत् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति