वन पर्व  अध्याय १३७

लोमश उवाच

यवक्रीस्तामुवाचेदमुपतिष्ठस्व मामिति |  ३   क
निर्लज्जो लज्जय़ा युक्तां कामेन हृतचेतनः ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति