वन पर्व  अध्याय १३७

लोमश उवाच

स तदा मन्युनाविष्टस्तपस्वी भृशकोपनः |  ९   क
अवलुप्य जटामेकां जुहावाग्नौ सुसंस्कृते ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति