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द्रोण पर्व
अध्याय १३७
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सञ्जय़ उवाच
भीमस्य निघ्नतः शत्रून्पार्ष्णिं जग्राह पाण्डवः |  ५१   क
द्रोणोऽपि पाण्डुपाञ्चालान्व्यधमद्रजनीमुखे ||  ५१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति