आदि पर्व  अध्याय १३८

वैशम्पाय़न उवाच

तेन विक्रमता तूर्णमूरुवेगसमीरितम् |  १   क
प्रववावनिलो राजञ्शुचिशुक्रागमे यथा ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति