आदि पर्व  अध्याय १३८

वैशम्पाय़न उवाच

धर्मादिन्द्राच्च वाय़ोश्च सुषुवे या सुतानिमान् |  १९   क
सेय़ं भूमौ परिश्रान्ता शेते ह्यद्यातथोचिता ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति