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शान्ति पर्व
अध्याय १३३
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कापव्य उवाच
यो व्राह्मणान्परिभवेद्विनाशं वापि रोचय़ेत् |  १८   क
सूर्योदय़ इवावश्यं ध्रुवं तस्य पराभवः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति