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द्रोण पर्व
अध्याय १३८
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सञ्जय़ उवाच
सर्वास्तु सेना व्यतिसेव्यमानाः; पदातिभिः पावकतैलहस्तैः |  १५   क
प्रकाश्यमाना ददृशुर्निशाय़ां; यथान्तरिक्षे जलदास्तडिद्भिः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति