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द्रोण पर्व
अध्याय १४५
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सञ्जय़ उवाच
ततः कर्णो हतं मत्वा वृषसेनं महारथः |  ४०   क
पुत्रशोकाभिसन्तप्तः सात्यकिं प्रत्यपीडय़त् ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति