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द्रोण पर्व
अध्याय १३८
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सञ्जय़ उवाच
तेन प्रकाशेन दिवङ्गमेन; सम्वोधिता देवगणाश्च राजन् |  ३०   क
गन्धर्वय़क्षासुरसिद्धसङ्घाः; समागमन्नप्सरसश्च सर्वाः ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति