अनुशासन पर्व  अध्याय १०५

भीष्म उवाच

स गौतमं पुरस्कृत्य सह पुत्रेण हस्तिना |  ६२   क
दिवमाचक्रमे वज्री सद्भिः सह दुरासदम् ||  ६२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति