शान्ति पर्व  अध्याय १३९

युधिष्ठिर उवाच

हीने परमके धर्मे सर्वलोकातिलङ्घिनि |  १   क
अधर्मे धर्मतां नीते धर्मे चाधर्मतां गते ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति