शान्ति पर्व  अध्याय २५०

नारद उवाच

एवमुक्ता महावाहो मृत्युः परपुरञ्जय़ |  ११   क
न व्याजहार तस्थौ च प्रह्वा भगवदुन्मुखी ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति