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अनुशासन पर्व
अध्याय १३९
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वाय़ुरु उवाच
गले गृहीत्वा क्षिप्तोऽस्मि वरुणेन महामुने |  २१   क
न प्रय़च्छति ते भार्यां यत्ते कार्यं कुरुष्व तत् ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति