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शान्ति पर्व
अध्याय १३९
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विश्वामित्र उवाच
न पातकं भक्षणमस्य दृष्टं; सुरां पीत्वा पततीतीह शव्दः |  ८६   क
अन्योन्यकर्माणि तथा तथैव; न लेशमात्रेण कृत्यं हिनस्ति ||  ८६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति