अनुशासन पर्व  अध्याय १३९

वाय़ुरु उवाच

तां त्वकामय़त श्रीमान्वरुणः पूर्वमेव ह |  १३   क
स चागम्य वनप्रस्थं यमुनाय़ां जहार ताम् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति