वन पर्व  अध्याय १३९

लोमश उवाच

तत्र तौ समनुज्ञातौ पित्रा कौन्तेय़ जग्मतुः |  ३   क
आश्रमे त्वभवद्रैभ्यो भार्या चैव परावसोः ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति