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शान्ति पर्व
अध्याय १६८
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व्राह्मण उवाच
यदा न कुरुते धीरः सर्वभूतेषु पापकम् |  ४४   क
कर्मणा मनसा वाचा व्रह्म सम्पद्यते तदा ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति