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द्रोण पर्व
अध्याय १३९
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सञ्जय़ उवाच
सृञ्जय़ेष्वथ सर्वेषु निहतेषु चमूमुखे |  २५   क
धृष्टद्युम्नं रणे द्रौणिर्नाशय़िष्यत्यसंशय़म् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति