आदि पर्व  अध्याय १४

सूत उवाच

गरुडोऽपि यथाकालं जज्ञे पन्नगसूदनः |  २२   क
स जातमात्रो विनतां परित्यज्य खमाविशत् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति